यू तो इस बाज़ार में
चेहरे मिले हजार मुझे
पर न मिला मुझे कोई खिलखिलाता सा
बीच बाज़ार में
कोई बेचता गम को तौल के
और कोई अपनी खुशियों के मोल लगाता है
धंधा भी खूब जमा है
खरीदने वालो से ज्यादा बेचने वालो का मेला है
और तोह और कोई मुफ्त मे भी बेचता है
यही पे अपनी दुकान भी है
खरीदने वालो की अब भी कमी है
सुबह से शाम हो चली है और एक ढेली भी नहीं हिली है
बड़ा अजीब खेला है
चेहरे तो यू बदलते है चेहरों के
कोई गिरगिट क्या बदलेगा रंग अपने कपड़ो के
गलती से कुछ चेहरे आते है
अपनी खुशियों से हमारे गम की बोली लगते है
आप की खुशियों से ज्यादा तोह हमें हमारे गम नजर आते है
शाम से रात हो चली है
अब एक दो चेहरे नजर आते है
और अभागे हम अपनी दुकान समेट भूके घर को लौट जाते है
चेहरे मिले हजार मुझे
पर न मिला मुझे कोई खिलखिलाता सा
बीच बाज़ार में
कोई बेचता गम को तौल के
और कोई अपनी खुशियों के मोल लगाता है
धंधा भी खूब जमा है
खरीदने वालो से ज्यादा बेचने वालो का मेला है
और तोह और कोई मुफ्त मे भी बेचता है
यही पे अपनी दुकान भी है
खरीदने वालो की अब भी कमी है
सुबह से शाम हो चली है और एक ढेली भी नहीं हिली है
बड़ा अजीब खेला है
चेहरे तो यू बदलते है चेहरों के
कोई गिरगिट क्या बदलेगा रंग अपने कपड़ो के
गलती से कुछ चेहरे आते है
अपनी खुशियों से हमारे गम की बोली लगते है
आप की खुशियों से ज्यादा तोह हमें हमारे गम नजर आते है
शाम से रात हो चली है
अब एक दो चेहरे नजर आते है
और अभागे हम अपनी दुकान समेट भूके घर को लौट जाते है
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