Pages

Tuesday, August 2, 2011

पैसे की खनक से तो गरीबी का तोहफा अच्छा है

पैसे की खनक से तो गरीबी का तोहफा अच्छा है
सरकारी दफ्तर हो या प्राइवेट ऑफिस,
पैसा ही सबसे अच्छा है,
रिश्वतखोरों की होड़ में ,
सिर्फ अपना दिल नेक-सच्चा है,
पैसे की खनक से तो,
गरीबी का तोहफा अच्छा है|
छोटा बिल हो या बड़े स्कूल में दाखिला,
सब जगह मांगने वालों का जज्जा है,
कितना दे सकते हो भाई साहब,
या इस खेल का कच्चा है,
हमने बी कहा पैसे की खनक से तो,
गरीबी का तोहफा अच्छा है|
महंगाई के इस ज़माने में,
बंगला गाड़ी सबका सबका अच्छा है,
अमीरों की बस्ती में,
सिर्फ अपना ही घर कच्चा है,
पैसे की खनक से तो,
गरीबी का तोहफा अच्छा है|
जाओ अगर अस्पताल में भी,
इलाज पर रिश्वत टैक्स लगता है,
लोगों का भला करने से,
खुद का पेट नहीं भरता है,
मान लिया हमने भी पैसे की खनक से तो,
गरीबी का तोहफा कच्चा है|
-हेमंत खत्री

No comments:

Post a Comment